10 June 2016

इतिहास रच सकती हूँ मैं

मैंने आहुति बनकर देखा, यह प्रेम यज्ञ की ज्वाला है - यह कहना है कानपुर निवासिनी श्री हरीचन्द्र जी और  श्रीमती जमुना देवी जी की योग्य सुपुत्री सुषमा कुमारी जी का, इनकी शिक्षा है - बीएड. एमए. ( यू जी सी नेट समाजशास्त्र ) और अभी ये डिग्री कॉलेज में प्रवक्ता पद पर कार्यरत हैं ।
सुषमा जी अपने परिचय में कहती हैं - मेरा परिचय तब तक अधूरा है । जब तक मैं अपने माता पिता का जिक्र ना कर लूँ । आज मैं जो कुछ भी हूँ । इनके ही त्याग और कठिन संघर्ष के कारण ही हूँ । इनके ही दिये आर्शीवाद और दिये संस्कारों से ही आज मैंने अपनी पहचान बनायी है । ये कहती हैं - रंग तितलियों में भर सकती हूँ मैं....फूलों से खुशबू भी चुरा सकती हूँ मैं... यूँ ही कुछ लिखते-लिखते इतिहास भी रच सकती हूँ मैं... 
इनके काव्य संग्रह हैं - अनुगूँज, ह्रदय तारों का स्पंदन, टूटते तारों की उड़ान, वटवृक्ष
और इनका ब्लाग है - आहुति । ब्लाग पर जाने हेतु नाम पर क्लिक करें
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